विधि / ला में करियर

विधि/कानून व्यवस्था में रोजगार की संभावनाए :: एक शानदार करियर विकल्प

क्या आप एक ऐसे कॅरिअर की तलाश में हैं जो आपको गोली के किसी जोखि़म से रहित भीड़भाड़ वाले रणक्षेत्र के बीचों-बीच खड़ा कर देता है? क्या आपको कोर्ट रूम में रूपांतरित होने वाले आपराधिक सीरियलों से जुड़े अभिनय को देखना अच्छा लगता है?
विधि में कॅरिअर आपके भविष्य का सफर बन सकता है.

एलएलबी, जो कि लातिन शब्द लेगम बेक्कालॉरस से अनुदित है, एक अर्हता है जो कि बैचलर ऑफ लॉ के तौर पर जानी जाती है जबकि मास्टर डिग्री एलएलएम, लेगम माजिस्टर के तौर पर जानी जाती है.

वकीलों का अनेक प्रकार से हमारे रोज़मर्रा के जीवन पर प्रभाव होता है. वे घर खरीदने से लेकर, इच्छा पत्र लिखने, अपराधियों पर मुकदमेबाज़ी और प्रतिवाद करने तक हर बात से जुड़े होते हैं. वे परामर्श, रणनीति, समस्या निदान, लेखन, पक्ष, बीच-बचाव अनेक तरह के कार्य करते हैं जिनकी सूची असीमित है.

पिछले कुछ दशकों में भारत में विधि व्यवसाय में एक रणनीतिक और स्थाई बदलाव आये हैं. विद्वानों की एक लंबी सूची है, जिन्होंने महानता के शिखर को छूने के लिये इस व्यवसाय को अपनाया है. वे दिन लद गये जब काली पोशाकों और कोर्ट रूम्स तक वकीलों की रोजी-रोटी सीमित हुआ करती थी. कार्पोरेट कार्यालयों से लेकर मूवीज और मीडिया में रोज़गार तक वकीलों ने परंपरागत मार्ग से सुदूर अनेक कदम रखे हैं और अब वे वास्तविक दुनिया में एक बहुत ही शानदार जीवन जी रहे हैं.
वकील क्या करते हैं?

वकील एक ऐसा व्यक्ति होता है जो विधि में एक अधिवक्ता, वकील, अटार्नी, काउंसलर के तौर पर कार्य करता है. वकील अपने मुवक्किलों को सलाह देते हैं और निजी और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर कानूनी मुद्दों का समाधान उपलब्ध कराते हैं. वे कानूनों, नियमों और विनियमों की व्याख्या करते हैं और कानूनी दस्तावेज तैयार करते हैं. वे अदालतों में बहस और तर्क करते हैं तथा कानूनी मामलों में फैसले लेते हैं. वकील के तौर पर उससे ग्राहकों की समस्याओं के समाधान के लिये विविध प्रकार की स्थितियों के अनुरूप विधि के सम्यक सिद्धांतों को लागू करने की अपेक्षा होती है.

पूर्व में विधि को एक पारिवारिक व्यवसाय के तौर पर देखा जाता था-दादा और पिता के बाद पुत्र और पुत्रियां उनके विधिक कामकाज को संभालते थे. परंतु अब परिदृश्य बदल चुका है और कोई भी जिसका इस क्षेत्र के लिये लक्ष्य और रुचि है, वे इस पाठ्यक्रम को अपना सकते हैं और अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं. विधि व्यवसाय, लोकतांत्रिक प्रणाली का तीसरा विंग, एक बार फिर सर्वाधिक सम्मानजनक और सर्वाधिक मांग वाले कॅरिअर्स में से यह एक है जिसके तहत वकील न केवल समाचार बना रहे हैं बल्कि धन भी अर्जित कर रहे हैं. काला कोट धारण करने वाले अब दीवानी अदालतों के भीतर चक्कर लगाने वाले नहीं रह गये हैं बल्कि आज के वकील आधुनिक युग में कार्पोरेट बोर्ड रूम्स को भी चुन सकते हैं.

चूंकि विधिक व्यवस्था हमारे सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संकार्यों के सभी पहलुओं का व्यावहारिक नियमन करती है, अधिवक्ता विधिक रूचि के विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त कर सकते हैं. इनमें दीवानी मामले, फौज़दारी मामले, कंपनी कानून, कराधान कानून, श्रम कानून, संविधान कानून के साथ-साथ हाल में जुड़े कार्पोरेट कानून, मानवाधिकार कानून, अंतर्राष्ट्रीय कानून, पर्यावरणीय कानून, पेटेंट्स कानून, साइबर कानून, बौद्धिक संपदा कानून आदि शामिल हैं.

विशेषज्ञता के क्षेत्र-

  • दीवानी/फौज़दारी कानून
  • संवैधानिक कानून
  • प्रशासनिक कानून
  • मानवाधिकार कानून
  • परिवार कानून
  • कराधान
  • कार्पोरेट/बिजऩेस कानून
  • अंतर्राष्ट्रीय कानून
  • श्रम कानून
  • रियल एस्टेट कानून
  • बौद्धिक संपदा/पेटेंट कानून
  • समुद्री कानून
  • चिकित्सा कानून
  • मीडिया कानून और भी कई अन्य कार्य प्रोफाइल
  • मुवक्किलों से उनके विधिक विषयों को समझने और प्रबंधन के लिये मुलाकात और विचारविमर्श करना
  • मुवक्किलों की विनिर्दिष्ट अपेक्षाओं के अनुरूप आधिकारिक पेपर्स, लैटर्स और व्यक्तिगत समझौते का मसौदा तैयार करना
  • तथ्यों का पता लगाने के लिये मुवक्किलों और गवाहों के साथ भेंट के जरिए बचाव रणनीति तैयार करने के लिये सबूत एकत्र करना.
  • व्यक्तियों और व्यवसायिकों के लिये कानूनों, व्यवस्थाओं और विनियमों का अध्ययन और व्याख्या करना
  • कानूनी सिद्धांत और उदाहरणों की जानकारी का इस्तेमाल करते हुए मामलों में संभावित परिदृश्यों का विश्लेषण करना.
  • निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिये मुवक्किलों और अन्य संबद्ध नेटवर्क साझेदारों के साथ वार्तालाप और लेनदेन करना.
  • संविदाओं के निष्पादन और मसौदाकरण के लिये प्रबंधन और पर्यवेक्षण करना.
  • ग्राहकों और विरोधी अधिवक्ताओं के साथ पत्राचार करना.
  • विवादों के दौरान कोर्ट में मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व करना.

पात्रता

वकील बनने के लिये आपको विधि में बैचलर डिग्री अथवा बीए-एलएलबी की अर्हता प्राप्त करने की आवश्यकता होती है.
इसमें किन्हीं भी विषयों के साथ 10+2 के उपरांत 5 वर्षीय पाठ्यक्रम शामिल है. किसी भी विषयक्षेत्र में स्नातक के बाद 3 वर्षीय विधिक पाठ्यक्रम|

यद्यपि विधिक प्रैक्टिस के लिये अर्हता हेतु किसी सालिसिटर के साथ अथवा एडवोकेट फर्म के साथ एक वर्ष की अप्रेंटिसशिप अपेक्षित होती है. 2 वर्ष की अप्रेंटिसशिप के बाद विधिक अप्रेंटिस बार काउंसिल द्वारा आयोजित आर्टिकल्ड क्लर्क की परीक्षा में बैठ सकता है जिससे वकील को प्रेटिक्स करने का लाइसेंस मिल जाता है.

पाठकों को यह भी बताना जरूरी है कि यदि कोई छात्र दूरस्थ शिक्षा के माद्यम से विधि पड़ना चाहता है तो ये सुविधा अब बंद कर दी गयी है | नये नियमो के अनुसार आप विधि /ला के किसी भी डिग्री पाठ्यक्रम में नियमित रूप से ही एडमिशन लेकर पढाई कर सकते है |

कोई भी या तो किसी भी विषय में स्नातक के उपरांत 3 वर्षीय विधिक पाठ्यक्रम की पढ़ाई कर सकता है अथवा 12वीं श्रेणी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत 5 वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया जा सकता है जो कि एकीकृत बीए एल एल बी (ऑनर्स) पाठ्यक्रम होता है. कई विश्वविद्यालय एकीकृत पाठ्यक्रम जैसे कि बीबीए-एलएलबी, बीकॉम/बीबीए-एलएलबी और यहां तक कि बी-टैक-एलएलबी संचालित करते हैं. पांच वर्ष का पाठयक्रम करने के इच्छुक छात्रों को अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं जैसे कि कॉमन लॉ एडमिशन टैस्ट (सीएलएटी) में उपस्थित होना होता है. विधिक पाठयक्रमों के लिये विधिक प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है:-

सीएलएटी(CLAT)-कॉमन लॉ एडमिशन टैस्ट:-   सामान्यत: जिसे सीएलएटी के तौर पर जाना जाता है, राष्ट्रीय स्तर की विधि प्रवेश परीक्षा है. आप किसी भी राष्ट्रीय विधिक संस्थानों, टीएनएनएलएस तिरुचिरापल्ली, डीएसएनएलयू विशाखापत्तनम, निरमा, अहमदाबाद आदि में कोई सीट हासिल करने के लिये 12वीं कक्षा के उत्तीर्ण करने के उपरांत इस प्रवेश परीक्षा में शामिल हो सकते हैं.

एलएसएटी(LST):- लॉ स्कूल एडमिशन टैस्ट:-     जिसे सामान्यता एलएसएटी के तौर पर जाना जाता है, भारत में विधिक स्कूलों द्वारा प्रयोग में लाये जाने हेतु अमरीका स्थित लॉ स्कूल एडमिशन काउंसिल द्वारा तैयार किया गया पाठ्य और मौखिक रिजनिंग कौशलों की मानकीकृत परीक्षा है.

डीयूएलएलबी/एलएलएम:(DULLB/LLM) विधि संकाय:-     दिल्ली विश्वविद्यालय विभिन्न विधिक पाठ्यक्रमों नामत: एलएलबी और एलएलएम पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिये अलग विधिक प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है.

सेट सिम्बायसिस(SET):-     सिम्बायसिस प्रवेश परीक्षा सामान्यत: एसईटी के तौर पर जानी जाती है जो कि सिम्बायसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के अधीन विभिन्न संस्थानों द्वारा संचालित स्नातकपूर्व पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिये आयोजित की जाती है.

यूएलएसएटी(ULST):-      यूपीईएस विधि अध्ययन अभिरुचि परीक्षा को सामान्यत: यूएलएसएटी के तौर पर जाना जाता है जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) संचालित करती है. प्रतिस्पर्धातमक प्रवेश परीक्षा बैचलर ऑफ लॉ (बीए एलएलबी) और कार्पोरेट लॉ, साइबर लॉ और बौद्धिक संपदा अधिकार में एलएलबी के लिये प्रवेश प्रदान करने हेतु आयोजित की जाती है.
आईपीयू सीईटी(IPU CET):-     एलएलबी गुरू गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा
बीएलएटी(BLT):- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय बीए एलएलबी प्रवेश परीक्षा
जामिया मिल्लिया इस्लामिया विधि प्रवेश परीक्षा
इलाहाबाद विश्वविद्यालय एलएलबी प्रवेश परीक्षा

अपेक्षित कौशल

विधि व्यवसाय में सफलता के लिये प्रमुख रूप में जिज्ञासु प्रकृति, विस्तारित ज्ञान, तार्किकता, प्रेरकता, मज़बूत निर्णय शक्ति और लेखन योग्यता जैसे कौशल होना आवश्यक है. एक सफल अधिवक्ता बनने के लिये किसी के पास अच्छा वक्ता कौशल और भाषा पर मज़बूत पकड़ होनी चाहिये. इन दिनों सक्षमता के साथ प्रभावी तौर पर विधि की प्रैक्टिस के लिये और अधिक कौशल अपेक्षित होते हैं. इनमें से कुछेक इस प्रकार हैं:-

  • अच्छा सम्प्रेषण कौशल
  • तीव्र प्रत्युत्तरता
  • उत्कृष्ट स्मृति
  • खुला और लचीला दिमाग
  • अच्छे प्राधिकृत नेतृत्व गुण
  • तार्किक योग्यता
  • अच्छा श्रोता और शक्तिशाली सम्प्रेषण कौशल
  • सभी प्रकार के कानूनों, नियमों और विनियमों तथा अधिसूचनाओं की जानकारी
  • धैर्य-कुछ मामले लंबे समय तक चलते रहते हैं.
  • नियमित सीखते रहने और सूचनाएं एकत्र करने की योग्यता
  • तनाव-कठोर निर्णय करने की सक्षमता जो कि अक्सर ज्यादातर ट्रायल्स के दौरान लेने पड़ते हैं.

संभावना

विधि किसी भी देश में बहुत ही लोकप्रिय कॅरिअर विकल्प है और निश्चित तौर पर व्यापक कॅरिअर क्षमताओं के साथ सर्वाधिक सम्मानित व्यवसायों में से एक है. स्नातक योग्यता अर्जित करने के उपरांत एक अधिवक्ता के पास बहुत से व्यवसायिक विकल्प होते हैं. आप सरकार में, कार्पोरेट क्षेत्र में, वित्तीय संस्थाओं में, विधिक फर्म में, कंसल्टेंसी में काम कर सकते हैं अथवा निजी प्रैक्टिस कर सकते हैं.

सरकार में वकील विधि सेवा आयोग अथवा राज्य लोक सेवा आयोग प्रवेश परीक्षाएं उत्तीर्ण करके भारतीय विधिक/न्यायिक सेवा अथवा राज्य विधिक सेवा में शामिल हो सकते हैं. जिनका चयन होता है वे जिला अदालत में मुन्सिफ के तौर पर कार्यभार ग्रहण करते हैं और समय के साथ जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद तक अथवा न्यायिक और राजस्व विभागों में वरिष्ठ पदों तक पहुंच जाते हैं.

कोई अधिवक्ता सेनाएं चयन बोर्ड की परीक्षाओं और साक्षात्कार के जरिए रक्षा सेवाओं में जज एडवोकेट जनरल्स विभाग में विधिक शाखा के लिये आवेदन कर सकता है.

ज्यादातर अधिवक्ता विधिक फर्मों में रोज़गार प्राप्त करते हैं अथवा दीवानी और फौज़दारी मामलों, संपत्ति, उत्तराधिकार, संविदा और वाणिज्यिक मामलों, चोरी, हत्या, समाज और शासन के विरुद्ध अपराध आदि मामलों में निजी प्रैक्टिस करते हैं. अन्य विशेषज्ञ क्षेत्रों में कर कानून, आयकर, संपत्ति कर, संपदा शुल्क आदि से संबंधित अन्य मामले अथवा श्रम कानून, किसी संगठन में प्रबंधन और श्रमिकों के बीच उत्पन्न समस्याओं को हल करने अथवा सीमा शुल्क एवं उत्पाद कर, संवैधानिक कानून, अंतर्राष्ट्रीय कानून और कई अन्य प्रकार के मामले शामिल हो सकते हैं.

आजकल के दिनों में विधि स्नातकों के लिये कार्पोरेट से जुड़े रोज़गारों का प्रलोभन है. अब विधि स्नातकों के लिये सर्वाधिक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है. देश की कुछेक विधिक फर्में हैं: अमरचंद मैंगाल्डस, एजेडबी एंड पार्टनर्स, जे सागर एसोसिएट्स, खेतान एंड कंपनी, लुथरा एंड लुथरा. चर्चित क्षेत्र हैं: कार्पोरेट कानून, अंतर्राष्ट्रीय कराधान, साइबर कानून.
विधि स्नातकों और विधि प्रैक्टिसनर्स के लिये रोज़गार की निम्नलिखित संभावनाएं हैं:

  • मुकदमेबाज़ी : मुकदमेबाज़ी से जुड़ा वकील मामले को सुनता है, मुवक्किल के लिये मसौदा बनाता है और स्वयं या एक टीम के सहयोग से मामले को अधिकरण या अदालत में लड़ता है. साथ ही बौद्धिक संपदा कानूनों, कर कानूनों, आर्बिट्रेशन और संवैधानिक मामलों के वकील भी होते हैं.
  • भारतीय विधिक सेवा : विधायी विभाग में विधिक मामले और विधायी परिषद में भी विधिक सेवाओं के लिये विकल्प होते हैं.
  • विधि परामर्शदाताओं के अलावा: विधि आयोग के सदस्य, सरकारी वकील, सालिसिटर्स, अटार्नी जनरल ऑफ इंडिया, विधानसभाओं में विधिक सचिवालय, कैट में न्यायिक सदस्य, बिक्री कर, आयकर, उत्पाद कर और अन्य अधिकरणों में भी दिशानिर्देशों के अनुरूप नियुक्तियां होती हैं. उन्हें भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना में अदालती मामलों की कार्यवाही के लिये विधिक शाखाओं में कमीशन अधिकारियों के तौर पर भी नियुक्त किया जाता है.
  • शिक्षण एवं लेखन : विधि स्नातकों के लिये प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर्स और अतिथि प्रवक्ता बनने के लिये भी संभावनाएं होती हैं.
  • विधि पत्रकारिता भी इन दिनों प्रचलन में है.
  • विधि फर्में : अमरचंद मैंगाल्डस, एजेडबी, लुथरा एंड लुथरा, जेएसए, ट्रिलिगल, खेतान एंड कंपनी
  • कार्पोरेट घरेलू विधि विभाग : एचयूएल, आईसीआईसीआई, आईटीसी, अर्नस्ट एंड युंग, पीडब्ल्यूसी के अपने स्वयं के विधि विभाग हैं.
  • पीएसयूज : सेबी, ओएनजीसी, आईओसीएल, सेल
  • लीगल प्रोसेस आउटसोर्सिंग (एलपीओ) : पांगिया 3, ओएससी, सीपीए ग्लोबल, क्लच गु्रप
  • आईपी फर्में : आनंद एंड आनंद, रेमफ्राई एंड सागर, लाल एंड सेठी
  • रिसर्च : लेक्सिस नेक्सिस, मनुपात्रा
  • आर्बिट्रेशन कंसल्टेंसी :
  • करंजावाला, ओसिस
  • चैम्बर प्रैक्टिस
  • वरिष्ठ काउंसल के साथ कार्य करना
  • मुकदमेबाज़ी से जुड़ी फर्में
  • लाभ न कमाने वाले संगठन
  • शिक्षण संगठन

परंतु अब किसी भी प्रमुख विधि विद्यालय से स्नातकों के लिये अभूतपूर्व अवसर उपलब्ध हैं. भारत की अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के बाद उच्च कौशल प्राप्त वकीलों की जबर्दस्त मांग है जिन्हें विलय और अधिग्रहण, बैंकिंग और वित्त, अवसंरचना अनुबंध, ऋण पुनर्गठन, फेमा विनियमन, आईपीआर, कार्पोरेट अभिशासन, निजी इक्विटी लेन-देन, डब्ल्यूटीओ कानून आदि के लिये बहुत मांग है. छात्रों के लिये सीएसई, आईसीआरसी, यूएनएचसीआर आदि जैसे प्रतिष्ठित संगठनों में पर्यावरण या मानवाधिकारों से जुड़े मामलों से जुडऩे की भी संभावनाएं हैं.

पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कुछेक कालेज हैं:

छात्र कक्षा 11 और 12 से ही विधि प्रवेश परीक्षाओं के लिये तैयारी कर सकते हैं. सीएलएटी के अधीन आने वाले देश भर के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों की सूची निम्नानुसार है:-

  • नेशनल लॉ स्कूल इंडिया यूनिवर्सिटी, बंगलुरू (एनएलएसआईयू)
  • नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडी एंड रिसर्च, हैदराबाद (एनएएलएसएआर)
  • राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय, कोलकाता (एनयूजेएस)
  • राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय संस्थान, भोपाल (एनएलआईयू)
  • हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, रायपुर (एनएनएलयू)
  • गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, गांधी नगर (जीएनएलयू)
  • राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ (आरएमएलएनएलयू)
  • राजीव गांधी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पंजाब (आरजीएनयूएल)
  • चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना (सीएनएलयू)
  • राष्ट्रीय उन्नत विधि अध्ययन विश्वविद्यालय, कोच्चि (एनयूएएलएस)
  • राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ओडि़शा (एनएलयूओ)
  • राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय, रांची (एनयूएसआरएल)
  • राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय और न्यायिक अकादमी, असम (एनएलयूजेए)
  • राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली (एनएलयूडी) अपना स्वयं का एआईएलईटी आयोजित करती है.

इनके अलावा कुछ विश्वविद्यालय अपने स्वयं के पेपर आयोजित करते हैं. इनमें से हैं:-

  • सिम्बायसिस लॉ स्कूल
  • आईपी यूनिवर्सिटी
  • एमिटी यूनिवर्सिटी
  • यूपीईएस देहरादून
  • अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया कालेज

विधि क्षेत्र बहुत से धन और व्यापक संभावनाओं वाला एक आकर्षक व्यवसाय है परंतु इसके लिये निरंतर कठोर मेहनत करना अपेक्षित होता है. संगठन एक अच्छे टीम कार्य कौशलों, बिजनेस के तौर तरीकों, वार्तालाप कौशलों, जिम्मेदारी की अनुभूति और सीखने की इच्छाशक्ति को प्रमुखता देते हैं.

लेखक-उषा अल्बुकर्क व निधि प्रसाद


(उषा अल्बुकर्क कॅरिअर्स स्मार्ट प्रा. लिमि., नई दिल्ली में निदेशक हैं और निधि प्रसाद सीनियर काउंसलिंग मनोवैज्ञानिक हैं. ई-मेल : careersmartonline@gmail.com)
इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं.

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